Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 91, Verse 44
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 91, verse 44 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 91 · श्लोक 44
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
मुने तस्यामवस्थायामनुभूतं त्वया सुखम् ।
उत दुःखमिति ब्रूहि बोधाय मम मानद ॥ ४४ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामभद्र ने कहा : हे मानद, हे
मुनिवर, उस पाषाण आदि अवस्था में क्या आपने सुख का अनुभव किया अथवा दुःखका अनुभव
किया, यह मुझसे ज्ञान के लिए कहिए