Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 91, Verse 54
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 91, verse 54 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 91 · श्लोक 54
संस्कृत श्लोक
आतिवाहिकदेहेन तेन बोधात्मनाणुना ।
बृहता वा यथाकामं निर्वाणात्मावतिष्ठते ॥ ५४ ॥
हिन्दी अर्थ
बोधरूपी उक्त आतिवाहिक देह छोटी हो चाहे
बड़ी हो, उससे अपनी इच्छानुसार पुरुष निर्वाणरूप (समस्त प्रपंचों से रहित जीवन्मुक्तरूप)
होकर स्थित हो जाता है