Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 91, Verse 57
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 91, verse 57 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 91 · श्लोक 57
संस्कृत श्लोक
वज्रपाषाणपातालनभोम्बरगमागमान् ।
कुर्वतस्तादृशस्याशु न विघ्न उपजायते ॥ ५७ ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र, वज, पत्थर,
पाताल, आकाश एवं स्वर्ग आदि में यातायात कर रहे उसी तरह के विशुद्ध आत्मा को तनिक भी
विघ्न उपस्थित नहीं होता