Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 91, Verse 58
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 91, verse 58 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 91 · श्लोक 58
संस्कृत श्लोक
बोधमात्रशरीरेण यावदास्ते जडेष्वसौ ।
पदार्थेषु तथाभूतस्तावत्तत्रावतिष्ठते ॥ ५८ ॥
हिन्दी अर्थ
बोधमात्र शरीर से यह आत्मा जड़ पदार्थों में जब तक रहता है
तब तक उसी रूप से (बोधमात्र शरीर से ही) उनमें रहता है, अन्यरूप से नहीं