Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 91, Verse 60
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 91, verse 60 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 91 · श्लोक 60
संस्कृत श्लोक
बोधमात्रं विदुर्देहमातिवाहिकमव्ययम् ।
इदानीं त्वं तमेवेह बुधोऽनुभवसि स्वयम् ॥ ६० ॥
हिन्दी अर्थ
आप भी तत्त्वज्ञानी हैं; इसलिए आतिवाहिक देहभाव और धारणाओं के अनुसार जयद्भावरुपी
कोंदुकों का दर्शन आपके लिए भी दुलभ हैं, अतः मेरे कहे गये विषय की परीक्षा करें. इस आशय से
कहते हैं ।
भद्र, एकमात्र तत्त्वज्ञान ही अविनाशी आतिवाहिक देह है, यह तत्त्वज्ञों का मत है, इसलिए
अब आप यदि इच्छा करें, तो आतिवाहिक देह और धारणा द्वारा जगद्भाव का अवलोकन कर
सकते हैं