Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 92, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 92, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 92 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
चिरं गङ्गातरङ्गाङ्गदोलान्दोलनसश्रमः ।
श्रमस्वरूपाज्ञतया निवारितततश्रमः ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
भगवती भागीरथी के तरंगरूपी हिण्डोलों के आन्दोलनं से मुझे श्रम-सा अवश्य
लगता था, परन्तु दूसरों के परिश्रमो की निवृत्ति करने के उत्साह से उसका मुझे ज्ञान ही नहीं हो
पाता था, इसीलिए दूसरों के असीम श्रमो को मैं तत्काल ही नष्ट कर देता था