Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 92, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 92, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 92 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
नन्दनामोदमधुरो मधुरोदारसंसृतिः ।
चारुचैत्ररथोन्मुक्तो हृतकान्तारतश्रमः ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र, नन्दनवन में मधुर सुगन्धि के कारण मेरा गमन अति मधुर और उदार होता था
तथा जब मैं कुबेर के चैत्ररथ नामक उद्यान से प्रस्थान करता तब कान्ता जनों के सुरत श्रम को हर
देता था