Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 92, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 92, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 92 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
तुषारसीकरासारजरारोमविजर्जरः ।
आमोदयौवनोन्मादो मौनमार्दवशैशवः ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
तुषार कणों की जब महती वृष्टि होती थी,
तब तुषार कणरूपी धवल रोमों के कारण मैं बूढा सा लगता था, कुसुम आदि सुगन्धों से मैं यौवन
के उन्माद से चूर-सा हो जाता था तथा मौन एवं मृदुता के कारण मैं बालकरूप भी हो जाता
था