Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 92, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 92, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 92 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
चिरं भुकत्वेन्दुबिम्बाग्रं सुप्ता पूर्णाभ्रतल्पके ।
विधूय कमलानीकमपनीतरतश्रमः ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
चन्द्रबिम्ब में सर्वश्रेष्ठ अमृत का दीर्घकाल तक पान कर, पूर्ण मेघरूप
शय्यापर शयन कर तथा कमलो की पंक्ति को कपा कर दूसरे के या अपने सुरत जनित परिश्रम का
निवारण करता था