Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 92, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 92, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 92 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
समस्तरजसामेको व्योमगामी तुरंगमः ।
आमोदमदमातङ्गसमुल्लासमहासुहृत् ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
मैं समस्त धूलियों के लिए आकाशगामी घोड़ा तथा सुगन्धरूपी मत्त
मातंगका उल्लासप्रद महान् मित्र था