Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 92, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 92, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 92 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
धीरेणाप्य तडिच्छृङ्गं पयोदपशुपालकः ।
तन्तुः सीकरमुक्तानामरिधर्मा रजोरुजाम् ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
तडित्रूपी सींग को (गोपाल बालकों के वाद्य को)
प्राप्त कर उसके नाद से मैं मेघरूपी दुधार पशुओं का एक पालक-सा बन गया, जलकणरूपी
मोतियों के लिए भें सूत बन गया तथा धूलिनाशक जल के लिए मैंने शत्रुता मोल ली, क्योकि जल
को मैं सुखा देता था