Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 92, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 92, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 92 · श्लोक 19
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हिन्दी अर्थ
सुगन्धरूपी रत्नों का भँ लुटेरा था, यानी जबरन कलीरूपी गाँठ
खोलकर चुरा लेनेवाला विमानरूप नगरों का धारणकारी था, दाह (ताप) रूपी अन्धकार के लिए
मैं चन्द्रमा था और शैत्यरूपी चन्द्रमा के लिए क्षीरसागर था