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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 92, Verse 20

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 92, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 92 · श्लोक 20

संस्कृत श्लोक

प्राणापानकलारज्ज्वा प्राणिनां यन्त्रवाहकः । अरिर्मित्रं च द्वीपानां द्वीपसंचारणे रतः ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

प्राण, अपान की कलारूप रज्जु से मैं प्राणियों के यन्त्रो का चालक था, द्वीपो का तरगों से खण्डन और धूलियों से संवर्धन करने के कारण शत्रु-मित्र दोनों था तथा द्वीपों में संचार करने मे सदा निरत रहता था