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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 92, Verse 2

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 92, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 92 · श्लोक 2

संस्कृत श्लोक

संपन्नोऽस्म्यनिलो वल्लीललनालोकलासकः । कमलोत्पलकुन्दादिजालकामोदपालकः ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

मैं वायु बन गया । मैं वायु बनकर लतारूपी ललनाओं के साथ विलास करता था तथा कमल, उत्पल, कुन्द आदि फूलों की सुगन्ध की, स्वायत्त कर रक्षा करता था