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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 92, Verse 22

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 92, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 92 · श्लोक 22

संस्कृत श्लोक

एकक्षणलवेनैव चालिताखिलभूधरः । वर्णावलितरङ्गाणां गङ्गावाह इवैककृत् ॥ २२ ॥

हिन्दी अर्थ

प्रलयकाल में एक क्षणांश में ही बड़े-बड़े पर्वतों को उखाड़कर फेंक देता था । अनेक वर्णरूप तरगों को गंगा प्रवाह के सदृश धूलि के सम्मिश्रण से एकरूप बना देता था