Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 92, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 92, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 92 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
व्योमकाननमातङ्गः शरीरगृहगर्गटः ।
धूलीकदम्बविपिनमालालिङ्गननायकः ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
व्योमरूपी जंगल का मैं मतवाला हाथी था,
शरीररूपी घर का मैं गर्गट (निरन्तर शब्द करनेवाला एक तरह का यन्त्र) था, धूलिरूप रमणीसमूहका
तथा वनमाला रूप नायिकासमूह का आलिगन करने में मैं नायक था