Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 92, Verse 55
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 92, verse 55 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 92 · श्लोक 55
संस्कृत श्लोक
अपि तस्यामवस्थायां जगन्त्याकाशकोशके ।
मया दृष्टान्यसंख्यानि परमाणुकणं प्रति ॥ ५५ ॥
हिन्दी अर्थ
हे
राघव, इस प्रकार जल, वायु एवं अग्निरूपता, भूमिरूपता का अपनी आत्मा से मैंने ऐसे निर्माण
किया, जैसे स्वप्नों में प्रसिद्ध आत्मचिति मायाविस्तृत नगरादि का निर्माण करती है