Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 92, Verse 54
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 92, verse 54 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 92 · श्लोक 54
संस्कृत श्लोक
जगन्त्यङ्गे मयोढानि गूढानि प्रकटान्यपि ।
प्रतिबिम्बपुराणीव मुकुरेणाजडात्मना ॥ ५४ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे दर्पण प्रतिबिम्बरूप से अनेक नगरों को धारण करता
है, वैसे ही चेतनस्वरूप मैंने अपने अंगों में गुप्त तथा प्रकट अनेक जगत् धारण किये