Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 92, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 92, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 92 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
नन्दने कुन्दमन्दारमकरन्दरजोरुणः ।
नरकेऽङ्गारसंभारभूरिनीहारभासुरः ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र, स्वर्ग में कुन्द, मन्दार आदि के मकरन्द
ओर पराग (पुष्पधूलि) से धूसर तथा नरक मेँ अंगार की राशि तथा विपुल नीहार से लदा रहता
था