Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 92, Verse 62
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 92, verse 62 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 92 · श्लोक 62
संस्कृत श्लोक
अनुभूतं कृतं कष्टं यावत्क्वचन किंचन ।
परमार्थचमत्कारादृते नेहोपलभ्यते ॥ ६२ ॥
हिन्दी अर्थ
मैंने कहीं भी जो
कुछ अनुभव किया, जो कुछ बनाया, जो कुछ कष्ट सहा, वह सब परमार्थभूत चिदात्माका चमत्कार
ही था, क्योकि उसके बिना यहाँ कुछ प्राप्त हो ही नहीं सकता