Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 92, Verse 64
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 92, verse 64 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 92 · श्लोक 64
संस्कृत श्लोक
सर्वः सर्वत्र सर्वात्मा सर्वगः सर्वसंश्रयः ।
एतत्प्रबुद्धविषयमप्रबुद्धं न वेद्म्यहम् ॥ ६४ ॥
हिन्दी अर्थ
है, यह बात प्रबुद्ध योगियों के लिए है यानी ज्ञानी महात्माओं की दृष्टि में जगत् का स्वरूप यह
निकलता है और अज्ञानी अप्रबुद्धों की कथा तो मैं जानता ही नहीं, अबुद्ध अज्ञानी जगत् का जो
स्वरूप समझ कर बैठे हैं, उनको ज्ञानी देख ही नहीं सकता