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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, Verse 2

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 93, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 2

संस्कृत श्लोक

यावत्तत्र न पश्यामि स्वदेहं क्वचन स्थितम् । पश्यामि केवलं सिद्धं कमप्यन्यं पुरः स्थितम् ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

मैं अपनी पहले की कुटिया पर पहुँच गया । मैंने वहाँ चारों ओर खूब खोज की। कहीं पर भी मुझे अपना शरीर दिखाई नहीं दिया, परन्तु मैंने सामने बैठे किसी दूसरे सिद्ध को देखा