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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, Verse 20

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 93, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 20

संस्कृत श्लोक

सोऽपतत्पवनस्कन्धवलनावर्तवृत्तिभिः । सप्तद्वीपसमुद्रान्ते गीर्वाणरमणावनौ ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

प्रवह आदि पवन स्कन्धो का जो परिवर्तन है, इससे जनित आवर्त -वृत्तियों से यानी जैसे आवर्त में घूम रहा जल नीचे घुस जाता है, वैसे ही वह सिद्ध सात द्वीप ओर चार समुद्रो के पार की देवताओं की आश्रय कांचन भूमि पर गिरे