Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, Verse 22
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 93, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
न प्रबुद्धो बभूवासौ विचरं तमचेतनः ।
पाषाणदेह इव वा तूलात्मेवैव वा लघुः ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
वह सिद्ध इतने ऊँचे स्थान से गिरे, फिर भी उनका शरीर न तो टूटा ओर न उनकी
समाधि ही भंग हुई, क्योकि वह योगबल के प्रभाव से वजशरीर बन गये थे या तूलपिण्ड के सदृश
अत्यन्त हलके बन गये थे