Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 93, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
मया तदवबोधार्थमथ यत्नवता तदा ।
कृत्वा जलदतां व्योम्नि वृष्टं गर्जितमूर्जितम् ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर उनको समाधि से जगाने के लिए प्रयत्नवान् होकर मैंने
उस समय मेघरूप धारण किया और मेघ बनकर खूब बरसा और तेज गर्जना की