Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 93, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
करकाशनिपातेन तेन तस्मिन्दिगन्तरे ।
मयूरं प्रावृषेवामुं बुद्ध्या बोधितवानसौ ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
मेघरूप
होकर मैंने अपनी बुद्धि के प्रभाव से ओलेरूपी वज़की वृष्टि द्वारा उस महात्मा को समाधि से ऐसे
जगाया जैसे मेघ वर्षा से मयूर को जगाता है