Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 93, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
बभूवाभासिताङ्गश्रीर्विकासितविलोचनः ।
धारानिकरफुल्लात्मा प्रावृषीवाम्बुजाकरः ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
समाधि से जागने के बाद उनके समस्त अंगों
की शोभा प्रकाशित होने लग गई ओर उनके नेत्र भी विकसित हो उठे । उस समय वह ऐसे प्रतीत
हुए मानों वर्षा काल में धारापात से विकसित हुआ कमलवन हो