Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 93, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
क्व स्थितोऽसि करोषीदं किं च भो मुनिनायक ।
कस्त्वं कस्मादलं दूरान्न भ्रंशमपि चेतसि ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
हे मुनिश्रेष्ठ, आप कहाँ हैं, यह आप क्या कर रहे हैं, आप
हैं कौन और इतने दूरसे आपका नीचे पतन हुआ, फिर भी आप अपने चित्त में उसका अनुभव क्यों
नहीं करते ?