Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 93, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
इत्युक्तो मामसौ प्रेक्ष्य संस्मृत्य प्राक्तनीं गतिम् ।
उवाच वचनं चारु चातको जलदं यथा ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
जब मैंने ऐसा प्रश्न किया, तब उन्होने मेरी ओर दृष्टि की, फिर पूर्वं गतिका
स्मरण कर जैसे चातक मेघसे सुन्दर वचन कहता है वैसे ही मुझसे सुन्दर वचन कहे