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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, Verse 29

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 93, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 29

संस्कृत श्लोक

सिद्ध उवाच । प्रतिपालय मे यावत्स्ववृत्तान्तं स्मराम्यहम् । कथयिष्यामि ते पश्चात्पाश्चात्यं वृत्तमात्मनः ॥ २९ ॥

हिन्दी अर्थ

सिद्ध ने कहा : हे मुने, कुछ क्षण आप ठहरिये, तब तक मैं अपना वृत्तान्त याद कर लूँ । फिर मैं आपसे पूर्वजन्म का सारा किस्सा कह सुनाऊँगा