Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, Verse 33
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 93, verse 33 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 33
संस्कृत श्लोक
मुने चिरमहं भ्रान्तो देवोपवनभूमिषु ।
भोगामोदविमोहेषु षट्पदः पद्मिनीष्विव ॥ ३३ ॥
हिन्दी अर्थ
हे मुने, जैसे कमलों में भरा भ्रमण करता है वैसे ही मने दीर्घकाल तक भोगरूपी सुगन्ध
से पूर्णं मोहकारक देवताओं की उपवनभूमियों में उत्तरोत्तर परिभ्रमण किया