Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, Verse 34
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 93, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 34
संस्कृत श्लोक
दृश्यनद्यामथो चित्तजलकल्लोलहेलया ।
चक्रावर्तोह्यमानेन मयोद्विग्नेन चिन्तितम् ॥ ३४ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर
चित्तरूपी जल के तरगों के हिलोरों से दृश्यरूपी नदी में चक्रावर्तनों से रात-दिन बह रहे मैंने
दीर्घकाल के बाद विवेक का आविर्भाव होने पर संसार से उद्विग्न होकर यों विचार किया