Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, Verse 35

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 93, verse 35 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 35

संस्कृत श्लोक

संसारसागरे दृश्यकल्लोलैरहमाकुलः । कालेनोद्वेगमायातश्चातकोऽवग्रहे यथा ॥ ३५ ॥

हिन्दी अर्थ

संसाररूपी सागर में दृश्यरूपी तरंगों से मैं अत्यन्त व्याकुल हो गया और दीर्घकाल के बाद एसे उद्वेग को प्राप्त हुआ जैसे कि वृष्टि के अभाव में चातक उद्वेग को प्राप्त होता है