Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 93, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
विषया विषवैषम्या वामाः कामविमोहदाः ।
रसाः सरसवैरस्या लुठन्नेषु न को हतः ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
शब्द आदि विषय
विष के सदृश मरण, उन्माद आदि विषमता पैदा करनेवाले हैं, स्तर्यो कामरूप विमोह में ही
फँसानेवाली हैं, राग सरस पुरुष को भी नीरस बना देने वाले हैं, इसलिए इनमें पडनेवाला कौन
पुरुष नष्ट नहीं हुआ ? हिरण, हाथी आदि एक-एक वस्तु मेँ आसक्ति रखने के कारण वध
एवं बन्धन को प्राप्त होते हैं, यह सबको विदित है