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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, Verse 43

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 93, verse 43 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 43

संस्कृत श्लोक

यौवनोल्लासकलिला जराधवलफेनिला । काकतालीययोगेन संपन्नसुखबुद्बुदा ॥ ४३ ॥

हिन्दी अर्थ

उसमें यौवन का उल्लास ही कीचड़ भरा पड़ा है, जरारूपी धवल फेन है, काकतालीय के योग से उसमें कभी-कभी सुखरूप बुलबुले भी उठते रहते हैं