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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, Verse 49

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 93, verse 49 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 49

संस्कृत श्लोक

शतशः परिवर्तन्ते प्रतिपिण्डं क्षणं प्रति । कुलालचक्रकाभावा इव भावा भवाम्बुधौ ॥ ४९ ॥

हिन्दी अर्थ

इस संसाररूपी सागर में प्रतिदेह और प्रतिक्षण भाव यानी योग्य वस्तुओं का, कुम्हार के चाकपर चढ़ाये गये सकोरों के सदृश, सैकड़ों बार परिवर्तन होता ही रहता है