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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, Verse 51

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 93, verse 51 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 51

संस्कृत श्लोक

आयुषः खण्डखण्डाश्च निपतन्तः पुनःपुनः । न कश्चिद्वेत्ति कालेन क्षतानि दिवसान्यहो ॥ ५१ ॥

हिन्दी अर्थ

आयु के टुकड़े-टुकड़े क्षण क्षण में बार बार गिरते रहते हैं, परन्तु आश्चर्य की बात है कि कोई भी प्राणी काल के द्वारा विनष्ट किये गये आयु के दिनों को जान नहीं पाता