Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, Verse 70
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 93, verse 70 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 70
संस्कृत श्लोक
धावन्ति विषयाँल्लक्ष्यमुन्मुक्ताश्चित्तसायकाः ।
स्पृशन्ति न गुणान्भूयः कृतघ्नाः सौहृदं यथा ॥ ७० ॥
हिन्दी अर्थ
छुटे हुए चित्तरूपी बाण विषयरूप लक्ष्य की ओर ही स्वभावतः जाते हैं, फिर वे विवेक आदि गुणों
का ऐसे ही स्पर्श नहीं करते, जैसे कि कृतघ्न पुरुष सहृदयता का