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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, Verse 71

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 93, verse 71 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 71

संस्कृत श्लोक

उत्पातवायुरेवायुर्मित्राण्येवातिशत्रवः । बन्धवो बन्धनान्येव धनान्येवाति नैधनम् ॥ ७१ ॥

हिन्दी अर्थ

आयु तो एक उत्पातवायु ही है, जो मित्र हैं, वे तो स्नेहासक्ति द्वारा ध्वंसक महाशत्रु ही हैं, जो बन्धुवर्ग हैं, वह तो बन्धनरूप ही हैं और जो धन है, उसे तो मृत्यु का ही एक तरह से साधन समझना चाहिए