Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, Verse 72
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 93, verse 72 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 72
संस्कृत श्लोक
सुखान्येवातिदुःखानि संपदः परमापदः ।
भोगा भवमहारोगा रतिरेव परारतिः ॥ ७२ ॥
हिन्दी अर्थ
आसक्ति
पैदा करने के कारण सुख अतिदुःखरूप ही हैं, सम्पत्तियाँ परम आपत्तियाँ ही हैं, भोग संसार में
महारोग हैं और भोगों से प्रेम महान् अरति यानी व्यग्रतारूप ही है