Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, Verse 73
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 93, verse 73 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 73
संस्कृत श्लोक
आपदः संपदः सर्वाः सुखं दुःखाय केवलम् ।
जीवितं मरणायैव बत मायाविजृम्भितम् ॥ ७३ ॥
हिन्दी अर्थ
पूर्वोक्त का विवरण करते हुए कहते हैं /
सभी सम्पत्तियाँ आपत्तियाँ ही हैं, सुख केवल दुःख के लिए ही हैं, जीवन मरण के ही लिए है,
अहो, यह माया का बढ़ाव महान् खेदकारक है