Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, Verse 74
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 93, verse 74 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 74
संस्कृत श्लोक
बहून्कालपरावर्तानिष्टानिष्टान्सुखं मनाक् ।
पश्यन्प्रियवियोगांश्च याति जर्जरतां जनः ॥ ७४ ॥
हिन्दी अर्थ
कालचक्र के प्रभाव से परिवर्तनशील
इष्टअनिष्ट प्रसंगों को, विषयों के किंचित् सुख को तथा प्रियजनों के वियोगों को देखता हुआ
मनुष्य जीर्ण भाव को प्राप्त हो जाता है