Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, Verse 75

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 93, verse 75 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 75

संस्कृत श्लोक

भोगा विषयसंभोगा भोगा एव फणावताम् । दशन्त्येव मनाक् स्पृष्टा दृष्टा नष्टाः प्रतिक्षणम् ॥ ७५ ॥

हिन्दी अर्थ

विषयसेवनरूप भोग तो सर्पों के फण ही समझ लेने चाहिए, क्‍योंकि उनका तनिक ही स्पर्श किया, तो तत्काल ही डँस लेते हैं ओर प्रतिक्षण देखते ही नष्ट हो जाते हैं