Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 93, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
अविक्षुभितमाशान्तमन्तःकरणकोटरम् ।
दधानं धीरया वृत्त्या शान्तोत्पातमिवाम्बरम् ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
विक्षोभों से रहित तथा पूर्णरूप से शान्त अन्तःकरणरूप कोटर को उन्होने धीर वृत्ति से एसे धारण
किया था मानों समस्त उत्पातो से रहित आकाश को धारण किया हो यानी शान्त क्षोभरहित
उनका अन्तःकरण आकाश के सदुश अत्यन्त विशाल था