Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 93, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
अपश्यता निजं देहं तं मुनिं पश्यता पुरः ।
इदं मया तदा तत्र चिन्तितं चारुचेतसा ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
उस कुटिया मेँ जब मैंने अपनी देह
नहीं देखी और सामने उक्त मुनि को देखा, तब वहाँ मैंने अपने शुद्ध अन्तःकरण से यह विचार
किया