Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 93, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
अयं कश्चिन्महासिद्धः संप्राप्तोऽस्मिन्दिगन्तरे ।
विचार्याहमिवैकान्तं विश्रामार्थी महाम्बरम् ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
यह कोई बड़े सिद्ध महात्मा है । मेने पहले जैसे एकान्त महाकाश की, विश्राम के लिए,
इच्छा की थी, उसी तरह इन्होंने भी विश्राम के लिए इसकी इच्छा की और सत्यसंकल्प के प्रभाव
से इस दिशा की ओर आ गये हैं