Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, Verse 86
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 93, verse 86 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 86
संस्कृत श्लोक
जीर्यन्ते जीर्यतः केशा हुत्वा जीर्यन्ति जीर्यतः ।
क्षीयते जीर्यते सर्वं तृष्णैवैका न जीर्यते ॥ ८६ ॥
हिन्दी अर्थ
वृद्धावस्था प्राप्त कर रहे पुरुष के केश तथा
दाँत जीर्णशीर्ण हो जाते हँ, जीर्णं अवस्थावाले के लिए सब कुछ जीर्ण -शीर्ण हो जाता है, परन्तु
अकेली तृष्णा ही जीर्णं नहीं होती