Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, Verse 88
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 93, verse 88 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 88
संस्कृत श्लोक
बाल्यं यौवनवद्याति यौवनं याति बाल्यवत् ।
उपमानोपमेयत्वं भङ्गुरत्वं मिथोऽनयोः ॥ ८८ ॥
हिन्दी अर्थ
बाल्य आदि अवस्थाओं में भी विवेकादि की आशा नहीं है, यह कहते हैं /
बाल्य अवस्था युवावस्था के सदृश चली जाती है और युवावस्था बाल्य अवस्था के सदृश
चली जाती है, यों इन दोनों में परस्पर उपमानता, उपमेयता तथा विनश्वरता विद्यमान हैं