Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 94, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
अह किल तदा राम संपन्नो गगनाकृतिः ।
न चाधारो न चाधेयश्चिदाकाशमयात्मकः ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, इसमें सन्देह नहीं
कि उस समय मैं गगनाकार हो गया था | न तो मेरा कोई आधार था ओर न कोई आधेय था | में
तो चिदाकाशप्रचुर जो मन है, तद्रूप ही हो गया था