Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 94, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
मनोमननमात्रात्मा पृथ्व्यादिपरिवर्जितः ।
संकल्पपुरुषाकारः पदार्थानामरोधकः ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
मन का जो मनन है एकमात्र वही मेरा स्वरूप था, मैं पृथ्वी आदि से बिलकुल रहित
था, मेरा आकार संकल्प के पुरुष के तुल्य था और मैं स्पर्श न होने के कारण स्तम्भ, कुम्भ आदि
विविध पदार्थो का रोधक नहीं था